Ashtalakshmi Stotram – The Divine Power of Eight Forms of Goddess Lakshmi
- _Shokesh _

- 6 hours ago
- 1 min read
सुमनसवंदित सुंदरि माधवि चंद्र सहोदरि हेममये । मुनिगण वंदित मोक्षप्रदायिनि मंजुळभाषिणि वेदनुते ॥
पंकजवासिनि देवसुपूजित सदगुणवर्षिणि शांतियुते । जय जय हे मधुसूदन कामिनि आदिलक्ष्मि जय पालय माम् ॥ 1 ॥
अयिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमये । क्षीरसमुदभव मंगलरूपिणि मंत्रनिवासिनि मंत्रनुते ॥
मंगलदायिनि अंबुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते । जय जय हे मधुसूदन कामिनि धान्यलक्ष्मि जय पालय माम् ॥ 2 ॥
जयवर वर्णिनि वैष्णविभार्गवि मंत्रस्वरूपिणि मंत्रमये । सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते ॥
भवभयहारिणि पापविमोचनि साधुजनाश्रित पादयुते । जय जय हे मधुसूदन कामिनि धैर्यलक्ष्मि जय पालय माम् ॥ 3 ॥
जय जय दुर्गतिनाशिनि कामिनि सर्वफलप्रद शास्त्रमये । रथगज तुरग पदादिसमानुत परिजनमंडित लोकनुते ॥
हरि-हर ब्रह्म सुपूजित सेवित तापनिवारिणि पादयुते । जय जय हे मधुसूदन कामिनि श्री गजलक्ष्मि पालय माम् ॥ 4 ॥
अयि खगवाहिनि मोहिनि चक्रिणि राग विवर्धिनि ज्ञानमये । गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि सप्तस्वरवर गाननुते ॥
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर मानववंदित पादयुते ।
जय जय हे मधुसूदन कामिनि संतानलक्ष्मि पालय माम् ॥ 5 ॥
जय कमलासनि सदगतिदायिनि ज्ञान विकासिनि गानमये । अनुदिनमर्चित कुकुंमधूसर भूषितवासित वाद्यनुते ॥
कनक धरा स्तुति वैभव वंदित शंकर देशिक मान्य पते । जय जय हे मधुसूदन कामिनि विजयलक्ष्मि जय पालय माम् ॥
6
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये । मणिमय भूषित कर्णविभूषण शांतिसमावृत हास्यमुखे ॥
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि काम्य फलप्रद हस्तयुते । जय जय हे मधुसूदन कामिनि विद्यालक्ष्मि पालय माम् ॥ 7 ॥
घिमि घिमि धिम् घिमि धिंधिमि धिंधिमि दुंदुभिनाद सुपूर्णमये । घुमघुम घुंघुम घुंघुम घुंघुम शंखनिनाद सुवाद्यनुते ॥
वेदपुराणेति हास सुपूजित वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते । जय जय हे मधुसूदन कामिनि श्री धनलक्ष्मि पालय माम् ॥ 8 ॥
॥ इति अष्टलक्ष्मी स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥



















Comments